ED ने 9 घंटे तक की अनिल अंबानी से पूछताछ

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      ED ने 9 घंटे तक की अनिल अंबानी से पूछताछ

      अनिल अंबानी की कंपनियों ने येस बैंक से 12,800 करोड़ रुपये से ज़्यादा के कर्ज़ लिए थे जो कि खराब कर्ज़ में बदल गए. ED जांच कर रही है कि क्या येस बैंक के संस्थापक राणा कपूर और उनके परिवार के सदस्यों को कर्ज़ के बदले में रिलायंस ग्रुप की ओर से क्या कोई घूस दी गई?

      अंबानी की कंपनी ने एक बयान में कहा, 'अनिल अंबानी ने दोहराया कि उनके ग्रुप का येस बैंक से सारा हिसाब-किताब सुरक्षित और कारोबार के सामान्य स्वरूप में किया गया. ग्रुप और येस बैंक के बीच सारा लेनदेन कानूनी वित्तीय नियमों के मुताबिक किया गया.'

      बयान के मुताबिक, 'अंबानी ने जांच एजेंसी को साफ किया कि रिलायंस ADAG ग्रुप का राणा कपूर या उनकी पत्नी या उनकी बेटियों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कोई संपर्क नहीं था, न ही राणा कपूर या उनके परिवार की ओर से संचालित कंपनियों से. रिलायंस ADAG ग्रुप येस बैंक से लिए गए सारे कर्ज का भुगतान करने को प्रतिबद्ध है, इसके लिए विभिन्न संपत्तियों से धन जुटाने वाली योजनाओं का सहारा लिया जाएगा.'


      बता दें कि येस बैंक संस्थापक और पूर्व सीईओ राणा कपूर को गिरफ्तार किए जाने के बाद CBI और ED की ओर से उनसे पूछताछ की जा रही है. ये पूछताछ भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के सिलसिले में हो रही है.

      अंबानी जहां पूछताछ के लिए गुरुवार को पेश हुए. वहीं अधिकतर संदिग्ध वित्तीय जांच एजेंसी को बता चुके हैं कि वे कोरोना वायरस के खतरे की वजह से वो अभी पूछताछ के लिए पेश नहीं हो सकते. इनमें DHFL के प्रमोटर कपिल वधावन और धीरज वधावन, इंडिया बुल्स के समीर गहलोत शामिल हैं. ED ने वधावन भाइयों को 17 मार्च और समीर गहलोत को 21 मार्च को पूछताछ के लिए बुलाया था.

      अंबानी मुंबई में ED दफ्तर में गुरुवार को सुबह 8.30 पर पहुंचे और शाम 6 बजे वहां से निकले. उनसे एजेंसी के डिप्टी डायरेक्टर स्तर के अधिकारी ने पूछताछ की. अंबानी ने भरोसा दिया कि उनका ग्रुप जांच अधिकारियों को पूरा सहयोग देगा.
      अंबानी के अलावा गुरुवार को येस बैंक के एक और अहम कर्ज़दार, कॉक्स एंड किंग्स के प्रमोटर पीटर केरकर को भी पूछताछ के लिए समन जारी किया गया था. कॉक्स एंड किंग्स ने येस बैंक से करीब 3500 करोड़ का कर्ज ले रखा है जो खराब कर्ज में बदल गया. बताया जाता है केरकर ने ED अधिकारियों को बताया कि कर्ज से ली गई रकम को उनके नेटवर्क की अन्य कंपनियों में बांटा गया था लेकिन उनके कुछ शीर्ष स्तर के कर्मचारियों ने उसमें हेरफेर किया, जिससे उनकी कंपनी कर्ज़दार हो गई.






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